आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ है आयु का विज्ञान अर्थात जीवन का विशेष ज्ञान। आयुर्वेद एक प्राचीन समग्र उपचार प्रणाली है जिसकी उत्पत्ति 5000 साल पहले ऋषियों और संतों के अलौकिक प्रयासों से भारत में हुई थी जो मानव शरीर को जीवंत करती है।

The literal meaning of Ayurveda is the science of age i.e. special knowledge of life. Ayurveda is an ancient holistic healing system originated in India 5000 years ago with the supernatural efforts of sages and saints that rejuvenates the human.

आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य: स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं च।

स्वस्थ लोगों को आजीवन स्वास्थ्य प्रदान करना और रोगग्रस्त लोगों के विकारों/बीमारियों को शमन करके उन्हें स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना।

Main Objective of Ayurveda: To provide lifelong health to healthy people and to provide health benefits to diseased people by alleviating their disorders/diseases.

आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य: समदोषः समाग्निश्च समधातुमलक्रियः। प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते।।

संतुलित त्रिदोष (वात, पित्त और कफ), संतुलित जठराग्नि, सन्तुलित सप्त धातु (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र), मल (पुरीष, मूत्र और श्वेद) का उचित निष्कर्षण तथा इन्द्रिय और मन को प्रसन्न रखना ही स्वास्थ्य है

Health according to Ayurveda: Balanced Tridosha (Vata, Pitta and Kapha), Balanced Jatharagni, Balanced Sapt Dhatu (Enzyme/ Plasma, Blood, Muscle, Fat, Bone, Bone Marrow and Semen), proper extraction of faeces (Stool, Urine and Sweat) and keeping of senses & mind happy are health.

आयुर्प्रयोगम् प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के अनुसार मनुष्य में रोगों के उत्पत्ति के मुख्य कारण है आधुनिक युग में नकारात्मक सोच, मशीन आधारित जीवन शैली, अंग्रेजी दवाइयों तथा डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग। परिणाम स्वरूप आज लगभग 95% लोग पेट दर्द, एसिडिटी, अपच, कब्ज, सिरदर्द, कमर दर्द, घुटनों का दर्द आदि समस्याओं से पीड़ित हैं। ये आम समस्याएं भविष्य में मधुमेह, मोटापा, थायरॉइड, रुमेटीइड गठिया, दिल का दौरा, ब्रेन ट्यूमर और स्ट्रोक, पक्षाघात, पार्किंसंस, ल्यूकेमिया आदि जैसी जानलेवा बीमारियों को जन्म दे रही हैं।

इन समस्याओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए हमारी संस्था सबसे पहले शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है। इसके बाद हम किसी अन्य थेरेपी जैसे फिजियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर, मैग्नेट थेरेपी, इंफ्रा रेड थेरेपी आदि की मदद लेते हैं। जिस प्रकार हमारा संगठन प्राकृतिक चिकित्सा में अपशिष्ट/ विजातीय पदार्थों को हटाने के लिए षट्कर्म शोधन विधि का उपयोग करता है, उसी प्रकार आयुर्वेद चिकित्सा में पंचकर्म शोधन विधि का उपयोग किया जाता है।

According to Ayurpryogam naturopathy and yoga, the main reasons for the occurrence of diseases in humans are negative thinking, machine-based lifestyle, abundant use of English medicines and canned foods in the modern era. As a result, today about 95% people are suffering from problems like stomach ache, acidity, indigestion, constipation, headache, back pain, knee pain etc. These common problems are arising to life-threatening diseases in future like diabetes, obesity, thyroid, rheumatoid arthritis, heart attack, brain tumour and stroke, paralysis, Parkinson’s, leukaemia etc.

To completely eradicate these problems, our organisation first of all removes the waste materials from the body. After this we take the help of any other therapies like physiotherapy, acupressure, magnet therapy, infrared therapy etc. Just as our organization uses Shatkarma Purification Method to remove waste/foreign substances in Naturopathy, similarly Panchkarma Purification Method is used in Ayurveda.

———[ पंचकर्म ]———
PANCHKARMA

पंचकर्म एक समग्र शोधन पद्धति है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित उपचारात्मक कर्म हैं (Panchakarma is a holistic purification method. It includes the following remedial actions):

  1. वमन (Vamana)
  2. विरेचन (Virechana)
  3. बस्ती (Basti/ Vasti)
  4. नस्यम (Nasyam)
  5. रक्तमोक्षण (Raktmokshana)

आयुर्वेद में सम्पूर्ण शोधन प्रक्रिया तीन चरण में संपन्न होते हैं: पूर्वकर्म, प्रधानकर्म और पश्चात् कर्म

In Ayurveda, the entire purification process takes place in three stages: Pre Process, Main Process and Post Process.

पूर्वकर्म: पूर्वकर्म पंचकर्म शुद्धिकरण प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है जो पाचन में सुधार के साथ-साथ सं शरीर में ग्रहित विषाक्त पदार्थों को मुलायम और चिकना करके शरीर को उपचार के लिए तैयार करता है। यह प्रधान कर्म से पहले किया जाता है जो 3 से 7 दिनों तक चलता है। पूर्वकर्म में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण और लोकप्रिय विधियाँ हैं: 1st पाचन, 2nd स्नेहन & 3rd  स्वेदन ।                                    

This is the initial stage of the Panchakarma purification process which prepares the body for healing by improving digestion as well as softening and smoothening the toxins stored in the body. This is done before the Pradhan Karma which lasts for 3 to 7 days. Important and popular methods used in Pre Process are 1st Digestion, 2nd Lubrication and 3rd Sweating.