क्रोमो थेरेपी रोग निवारण की एक प्रभावकारी वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है जिसमें विभिन्न रंगों के माध्यम से रोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया जाता है। इस चिकित्सा के अनुसार रोग उत्पत्ति का मुख्य कारण है शरीर के ऊर्जा केन्द्रों (चक्रों) के रंगों का असंतुलन। इसे रंग चिकित्सा, प्रकाश चिकित्सा, सूर्य प्रकाश चिकित्सा इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है। मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक रोगियों के सफल उपचार में क्रोमो थेरेपी एक किफायती एवं सकारात्मक विकल्प है।

आयुर्प्रयोगम् प्राकृतिक चिकित्सा व योग रंगो को सूर्य तप्त जल, तेल, मिश्री, दुग्ध शर्करा, ग्लिसरीन आदि, प्रत्यक्ष सूर्य स्नान या धुप की सेक, प्रत्यक्ष अवरक्त प्रकाश के माध्यम से शरीर के ऊर्जा केन्द्रों तक पहुंचाता है।इस प्रक्रिया से इन ऊर्जा केन्द्रों (चक्रों) से जुडी समस्त नस-नाड़ियाँ खुल जाती हैं और ऑक्सीजन युक्त रक्त का संचार बढ़ जाता है।फलस्वरूप मनुष्य को पुनर्यौवन प्राप्त होता है। नवीनतम वैज्ञानिक शोध के अनुसार सूर्य प्रकाश तरंग या कंपन का रूप है जो मानव शरीर में मौजूद निष्क्रिय ऊर्जा केंद्रों को कंपन या उत्तेजित करता है और रोगी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। श्री मद्भागवत गीता भी इस तथ्य का समर्थन करता है:

आरोग्यं भास्करादिच्छेत् धनं इच्छेत् हुताशनात्। ज्ञानं महेश्वरात् इच्छेत् मुक्तिमिच्छेत्जनार्दनात् ।। 

अर्थात सूर्य से आरोग्य की कामना, यज्ञ अग्नि से धन की कामना, महादेव शिव से ज्ञान की कामना और जनार्दन से मुक्ति/मोक्ष की कामना करो।

Chromo Therapy is an effective alternative medicine system for disease prevention in which diseases are successfully treated through different colors. According to this therapy, the main cause of disease is the imbalance of colors of the energy centers (chakras) of the body. It is also known as Chromo Therapy, Light Therapy, Sunlight Therapy etc. Chromo therapy is an economical and positive option for successful treatment of mental, physical, spiritual, intellectual and emotional patients.

Ayurprayogam Naturopathy & Yoga transmits colors to the energy centers of the body through Sun-heated water, oil, sugar candy, milk sugar, glycerin etc., direct sun bath or sun compress, direct infrared light. Through this process, all the nerves and veins connected to these energy centers (chakras) open and the circulation of oxygenated blood increases. As a result the human being attains rejuvenation. According to latest scientific research, Sunlight-energy, in the form of wave or vibration, vibrates the inactive energy centres present in human body and the patient becomes completely healthy. Sri Madhbhagwat Geeta also supports this fact: Arogyam Bhaskaradichhet Dhanam Ichhet Hutashanat. Gyanam Maheshwarat Ichchet Muktimichhetjanardanat.

In other words wish for health from the Sun, wish for wealth from the fire of Yagya, wish for knowledge from Mahadev Shiva and wish for liberation/moksha from Janardan.

सूर्य प्रकाश के उपचारात्मक तथ्य:

सूर्य प्रकाश ताप और ऊर्जा का अक्षय स्रोत है जिसमें सात रंग या बैनीआहपीनाला (बैंगनी, आसमानी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल) हैं। इसमें रोग निवारण, शक्तिवर्धक, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला, वात-पित्त-कफ संतुलन आदि गुण हैं जो मानव शरीर को आजीवन स्वस्थ और चुस्त व दुरुस्त रखते हैं।

सूर्य प्रकाश में उपस्थित रंगों के उपचारात्मक उपयोग निम्नलिखित हैं:

लाल रंग: लाल रंग सूर्य के प्रकाश में सर्वाधिक मात्रा (80%) में पाया जाने वाला प्राथमिक रंग है जो मानव शरीर की त्वचा द्वारा 100% अवशोषित होता है। सूर्य प्रकाश चिकित्सा में पित्त का रंग लाल माना गया है। लाल रंग मूलाधार चक्र से सम्बंधित है। यह गर्म प्रकृति का और पित्तवर्धक है।

कार्य:

  • तंत्रिका तंत्र (स्नायुमंडल) को उत्तेजित करना.
  • शरीर में गर्मी, शक्ति और उत्साह बढ़ाना.
  • शरीर के निष्क्रिय अंग को सक्रिय करना

उपचारात्मक गुण:

  • लाल रंग रक्तअल्पता, गठिया, जोड़ों के दर्द, सर्दी का दर्द, सूजन, मोच, लकवा, मधुमेह, पीलिया,पाचन रोग, बाल रोग इत्यादि रोगों के उपचार में लाभदायक है
  • शरीर में लाल रंग की कमी से सुस्ती, अधिक निद्रा, भूख में कमी, कब्ज, नीले नेत्र & नाख़ून जैसे विकार होते हैं।
  • शरीर में लाल रंग की अधिकता से त्वचा में सूजन, जलन और गर्मी संबंधी विकार उत्पन्न होते हैं।

लाल प्रकाश तप्त तेल या जल से गठिया और शिशु रोग में मालिश करने से जबकि लाल प्रकाश तप्त जल से फोड़े-फुंसी को धोने से लाभ मिलता है

सावधानियां:

  • लाल किरण तप्त तेल या जल से सामान्यतः मालिश करें केवल विशेष परिस्थिति मेंअल्पमात्रा में ही पियें ज़्यादा पीने से उल्टी व दस्त होने का डर रहता है|
  • लाल रंग वाली जगह पर खाना न खाएं, पाचन क्रिया खराब हो सकती है।
  • अगर सर्दियों में आपके तलवे ठंडे रहते हैं तो लाल मोजे का इस्तेमाल करें।

Curative Facts of Sunlight:

Sunlight is a renewable source of heat and light energy having seven colours as VIBGYOR (Violet, Indigo, Blue, Green, Yellow, Orange and Red). It has the properties of disease cure, strength enhancer, immunity booster, vat-pitta-phlegm balancing etc. which keeps the human body healthy and fit for lifelong.

Following are the therapeutic uses of the colors present in sunlight:

Red Color: Red color is the primary color found in maximum quantity in sunlight which is 100% absorbed by the skin of the human body. In Surya Prakash therapy, the color of Pitta is considered red. Red color is associated to Muladhara Chakra. It is Hot in nature and the Pitta enhancer.

Functions:

  • Stimulates the nervous system.
  • Increases heat, strength and excitement in the body
  • Activates inactive parts of the body.

Therapeutic Proprties:

  • Red color is beneficial in the treatment of anemia, arthritis, joint pain, winter pain, swelling, sprain, paralysis, diabetes, jaundice, digestive diseases, child diseases etc.
  • Deficiency of red color in the body causes disorders like lethargy, excessive sleep, loss of appetite, constipation, blue eyes and nails.
  • Excess of red color in the body causes swelling, irritation and heat disorders in the skin.
  • Massaging with red light heated oil or water is beneficial in arthritis and baldness, while washing boils and pimples with red light heated water is beneficial.

Precautions:

  • Generally massage with Redray-heated oil or water. Drink in small quantities only in special circumstances. There is a fear of vomiting and diarrhea if you drink too much.
  • Do not eat food at red colored places, digestion may get disturbed.
  • If your soles are cold in winter, use red socks.