आयुर्प्रयोगम प्राकृतिक चिकित्सा व योग रोगियों को समग्र उपचार प्रदान करने के साथ-साथ दीर्घकालिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए उनकी जीवनशैली पर विशेष ध्यान देती है। मानव की जीवनशैली प्रकृति के स्वास्थ्य संबंधी नियमों के अनुरूप होनी चाहिए, स्वास्थ्यवर्धक होनी चाहिए, सकारात्मकता प्रदान करने वाली होनी चाहिए और मानवीय मूल्यों को संरक्षित करने वाली होनी चाहिए। इस प्रकार, हमारा संगठन न केवल रोगियों के शारीरिक उपचार पर बल्कि उनके मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है, ताकिस्वस्थ भारत, समृद्ध भारत के हमारे उद्देश्य को प्राप्त किया जा सके। हमारी उपचार प्रणाली जीवनशैली के अंतर्गत निम्नलिखित विधियों का उपयोग करती है:

  1. प्राकृतिक जीवन-यापन: प्रदूषित वातावरण और मिलावट के युग में शुद्धता की कल्पना बेमानी है। प्रकृति द्वारा प्रदत्त वायु, जल, अग्नि (सूर्य प्रकाश के रूप में), जंगल, पर्वत और धरती को हमारी धनलोलुपता ने पूर्णरूप से दूषित कर दिया है। नतीजा यह है कि न तो हमें स्वच्छ हवा मिल पा रही है, न शुद्ध पानी, न चारों ओर हरियाली है और न ही धरती से उगने वाले अनाज शुद्ध हैं। इस विषम परिस्थिति में आम मानव क्या करे? इसका एक मात्र समाधान है किसी भी उपचार पद्धति द्वारा अपनी जीवन शक्ति को बढ़ाये.. अपने आस-पास के क्षेत्र की हरियाली और स्वच्छता बनाये रखें.. अपनी दिनचर्या में कृत्रिम साधनों के स्थान पर हाथ-पैरों का प्रयोग करें.. अपने जीवन के कुछ दिन प्रकृति के करीब रहें और उसके मौन संकेतों को समझने का प्रयास करें।
  2. मानसिक संतुलन: हमारे परम गुरुदेव श्री करौली शंकर महादेवजी के शोध के अनुसार, नकारात्मक और रोगात्मक स्मृतियाँ मस्तिष्क की सूजन को बढ़ा देती हैं। यही सूजन रोग का मूल कारण है। आधुनिक शोध से भी पता चलता है कि विकृत एवं नकारात्मक मानसिकता रोगियों के स्वस्थ होने में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए, हमारा संगठन योग, प्राणायाम, ध्यान-साधना, भजन-कीर्तन, जप-तप, मनोरंजक और रोचक साधनों जैसे गीत-संगीत, प्रेरणादायक कथावाचन, साधु-संतों का प्रवचन इत्यादि के माध्यम से मन और मस्तिष्क को शांत और संतुलित करता है।
  3. आहार: मानव का स्थूल शरीर अन्नमय कोष से बना है जिसका प्रभाव शरीर, मन और मस्तिष्क पर पड़ता है। इस शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्राकृतिक आहार यानि सप्राण आहार का प्रयोग करना चाहिए। खाद्य चिकित्सकों ने शोध में यह भी पाया है कि 80% क्षारीय/कच्चा भोजन और 20% अम्लीय/पका हुआ भोजन का संयोजन मानव शरीर के लिए अमृत के समान है। हमारे आहार विशेषज्ञ स्वस्थ और बीमार लोगों को आहार संबंधी निम्नलिखित नियमों का पालन करने की सलाह देते हैं:
  • खाने से पहले क्या करें और क्या न करें?
  • कैसे खाएं?
  • क्या खाएं?
  • कितना खाएं?
  • कितनी बार खाएं?
  • खाने के बाद क्या करें और क्या न करें?
  1. आंतरिक शुद्धि: हमारा संगठन प्राकृतिक विधि का उपयोग करके रोगियों के महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों (मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े, पेट, यकृत, गुर्दे और बृहदान्त्र) की व्यवस्थित शुद्धि प्रदान करता है। इससे रोगियों को दीर्घकालिक एवं स्थायी स्वास्थ्य लाभ मिलता है तथा कायाकल्प स्वतः ही हो जाता है।
  2. संतुलित जीवन: साधारण मानव एक दिन यानि 24 घंटे में मुख्यतः 6 प्रकार का कार्य करता है:
  • प्रातः व संध्या नित्य कार्य (शौच, शरीर की बाह्य सफाई) 1-2 घंटे के लिए
  • मानसिक और शारीरिक संतुलन कार्य (प्रातः भ्रमण/ धीमी दौड़, व्यायाम, योग, प्राणायाम, ध्यान इत्यादि) 1-3 घंटे के लिए
  • पोषण कार्य (खाना-पीना) 1-2 घंटे के लिए
  • जीवकोपार्जन कार्य 8-10 घंटे के लिए
  • विश्राम और शयन कार्य 8-10 घंटे के लिए

उपरोक्त सभी 5 कार्यों के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन जीना ही संतुलित जीवन है जहां शारीरिक शक्ति, मानसिक शांति, आध्यात्मिक सुख और बौद्धिक विकास की पूरी संभावना होती है।

Ayurprayogam Naturopathy provides holistic treatment to the patients along with paying special attention to their lifestyle to maintain long term health. Human lifestyle should be in accordance with the health related rules of nature, should be healthy, should give positivity, and should preserve human values. Thus, our organization focuses not only on the physical treatment of patients but also on their mental, intellectual and spiritual development, so as to achieve our objective of “Healthy India, Prosperous India”. Our treatment system uses the following methods under lifestyle:

  1. Natural Living: In the era of polluted environment and adulteration, the idea of purity is meaningless. The air, water, fire (in the form of sunlight), forests, mountains and earth provided by nature have been completely polluted by our greed for money. As a result, we are neither able to get clean air nor pure water, neither is there greenery around nor are the grains growing from the earth pure. What should a common man do in this difficult situation? The only solution to this is to increase your life force by any treatment methods.. Maintain greenery and cleanliness of your surrounding area.. Use hands and feet instead of artificial means in your daily routine.. Stay for some days of his life close to nature and try to understand its silent signals.
  2. Mental Balance: According to the research of our Supreme Gurudev Sri Karauli Shankar Mahadevji, negative and pathological memories worsen the swelling of the brain. Modern research also shows that Distorted and negative mind set is the biggest obstacle for patients to become healthy. Therefore, our organization calms and balances the mind and brain through yoga, pranayama, meditation, bhajan-kirtan, chanting-penance, entertaining and interesting means like songs and music, inspirational storytelling, discourses of sages and saints etc.
  3. Diet: The human physical body is made up of Annamaya Kosha which affects the body, mind and brain. To keep this body healthy, one should use natural diet i.e. Sapran diet. Food doctors have also found in research that the combination of 80% alkaline/raw food and 20% acidic/cooked food is like nectar for the human body. Our dieticians advise healthy and sick people to follow the following rules related to diet:
  • What to do and what not to do before eating?
  • How to eat?
  • What to eat?
  • How much to eat?
  • How often to eat?
  • What to do and what not to do after eating?
  1. Internal Purification: Our organization provides systematic purification of vital internal organs (brain, heart, lungs, stomach, liver, kidneys and colon) of the patients using natural method. Due to this, patients get long-term and permanent health benefits and rejuvenation happens automatically.
  2. Balanced Life: An ordinary human being does mainly 6 types of work in a day i.e. 24 hours:
  • Morning & evening routine (defecation, external cleaning of the body) for 1-2 hrs.
  • Mental and physical balancing work (Morning walk/jogging, yoga, pranayama, meditation etc.) for 1-3 hrs.
  • Nutrition work (eating and drinking) for a maximum of 1-2 hrs.
  • Livelihood work for a maximum of 8-10 hrs.
  • Rest & Sleep Actions for 8-10 hrs.

Living life in harmony with all the above tasks is a balanced life where there is full possibility of physical strength, mental peace, spiritual happiness and intellectual development.

पूर्ण सत्य तथ्य:

  • सभी प्रकार के दर्द (जोड़ों का दर्द, माइग्रेन, सिरदर्द और अन्य), मोटापा, दुबलापन, उच्च या निम्न रक्तचाप, थायराइड, कॉलेस्ट्रॉल, मधुमेह ये सभी बीमारियाँ नहीं बल्कि हमारे अव्यवस्थित खान-पान और जीवनशैली के दुष्प्रभाव हैं। इस परम सत्य को आज के एलोपैथिक चिकित्सक भी स्वीकार करने लगे हैं।
  • जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के लिए आजीवन दवाओं का सेवन अन्य खतरनाक बीमारियों को जन्म देता है। इसलिए भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को अपनाएं और जीवनभर स्वस्थ जीवन जिएं।
  • अव्यवस्थित जीवनशैली से होने वाली सभी बीमारियाँ बिल्कुल ठीक हो जाती हैं।
  • हमारी चिकित्सा प्रणाली कभी भी मरीज को एलोपैथिक दवाएं अचानक छोड़ने का निर्देश नहीं देती है, बल्कि पैथोलॉजी प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर और जब मरीज स्वस्थ महसूस करने लगे तो धीरे-धीरे दवाएं छोड़ने की सलाह देती है।
  • हमारी चिकित्सा प्रणाली में मधुमेह, रक्तचाप, थायराइड, मोटापा आदि रोगों का दवा-मुक्त उपचार पूर्णतः सफल एवं प्रभावी है।

Absolute Truth Facts:

  • All type of pain (joint pain, migraine, headache and others), obesity, thinness, high or low blood pressure, thyroid, cholesterol, diabetes all these are not diseases but the side effects of our disordered eating habits and lifestyle. Even today’s allopathic doctors have started accepting this ultimate truth.
  • Lifelong consumption of medicines for lifestyle diseases leads to other dangerous diseases. Therefore, adopt the ancient medical system of India and live a healthy life throughout your life.
  • All diseases caused by unorganized lifestyle are absolutely curable.
  • Our medical system never instructs the patient to give up allopathic medicines suddenly, but advises to leave the medicines gradually on the basis of pathology Lab. Test Reports and when the patient starts feeling healthy.
  • In our medical system, drug-free treatment of diseases like diabetes, blood pressure, thyroid, obesity etc. is completely successful and effective.