आयुर्प्रयोगम प्राकृतिक चिकित्सा व योग के अनुसार मालिश चिकित्सा मानसिक और शारीरिक संतुलन का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। मालिश हमारी चिकित्सा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है, यह सभी रोगियों को उनके विकारों के अनुसार दी जाती है।

According to Ayurpryogam Naturopathy and Yoga, massage therapy is the best medium for mental and physical balance. Massage is an integral part of our medical system, it is given to all patients according to their disorders.

मालिश हाथों से हल्का या गहरा दबाव डालकर शरीर के सभी अंगों को रगड़ने, सहलाने, थपथपाने, गोलाकार या रैखिक घुमाने की प्रक्रिया है।

Massage is the process of rubbing, caressing, patting, circular or linear rotation of all body parts by applying light or deep pressure with hands.

 

मालिश के प्रमुख कार्य/ गुण हैं:

·      मांसपेशियों को गतिमान रखना, उत्तेजित करना और मुलायम बनाना

·      जोड़ों को लचीला बनाना और स्नायुबंधन को ढीला करना

·      रोम छिद्रों को खोलना और त्वचा के एपिडर्मिस कोषों को उत्तेजित करना

·      रक्तवाहिनी नाड़ियों में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को निरंतर बनाये रखना

·      लसीका प्रवाह को उत्तेजित करके प्रतिरक्षा को बढ़ाना

The main functions/propertiess of massage are:

·      To mobilize, stimulate and soften the muscles.

·      Making joints flexible and loosening ligaments

·      Opening the pores and stimulating the epidermis cells of the skin.

·      Maintaining a constant flow of oxygenated blood through blood vessel

·      Boosting immunity by stimulating lymph flow.

 

मालिश का उपचारात्मक उपयोग:

·      अवसाद, चिंता, तनाव, सिरदर्द, माइग्रेन, अनिद्रा,, नकारात्मकता और अन्य मानसिक विकारों से राहत।

·      वात रोग, चोट-मोच, गर्भाशय खिसकना, नाभि खिसकना तथा जोड़ों के दर्द के लिए रामबाण उपचार।

·      त्वचा में जलन-चुभन (पेरेस्थिसिया) और स्नायु दर्द के उपचार में लाभकारी

Therapeutic uses of massage:

·      Relief from depression, anxiety, stress, headache, migraine, insomnia, negativity, depression and other mental disorders.

·      Panacea treatment for arthritis, bruises-sprains, uterine prolapse, navel prolapse and joint pain.

·      Beneficial in the treatment of paresthesia and nerve pain.

 

सावधानियां:

·      मालिश हमेशा खाने और नहाने के 2 घंटे पूर्व करें।

·      मालिश शरीर में होनेवाले रक्त संचार के विपरीत दिशा में कदापि नहीं करें

·      किसी विशेष अंग की मालिश 15-20 मिनट और पुरे शारीर की मालिश 45 मिनट तक करें

·      रोगी को मर्दन/मालिश के बाद कम से कम 1/2 घंटे तक कंबल या चादर ओढ़कर विश्राम करना चाहिए

·      निम्नलिखित स्थितियों में मालिश नहीं करें:

o  बुखार,थकावट, घाव, ताजा चोट, मैनिंजाइटिस, रक्तस्राव विकार, गहरी शिरा घनास्त्रता, र्ट्युमर, क्षतिग्रस्त नसें. कोई संक्रमण, सूजन, गंभीर एथेरोस्क्लेरोसिस, ओस्टोपिरोसिस, कैंसर, रीढ़ की हड्डी में दर्द/चोट, तीव्र निमोनिया इत्यादि

o  सर्जरी के तुरंत बाद, मासिकधर्म के दौरान और गर्भधारण के समय

o  दिल सम्बंधित बीमारी, मानसिक असंतुलन, त्वचा रोग इत्यादि

o  नशे की हालत में, दर्दनिवारक और रक्त पतला करने वाली दवाइयों के लेने के बाद

o  गुर्दे और जिगर की विफलता

Precautions:

·      Always do massage 2 hours before eating and bathing.

·      Never massage in the direction opposite to the blood circulation in the body.

·      Massage a particular body part for 15-20 minutes and massage the entire body for 45minutes.

·      After massage, the patient should rest for at least 1/2 hour by covering himself with
a blanket or sheet.

·      Do not massage in the following situations:

o  Fever, exhaustion, wounds, fresh injuries, meningitis, bleeding disorder, Deep vein thrombosis, tumors, damaged nerves, any infection, inflammation, severe atherosclerosis, osteoporosis, cancer, spinalcord pain/injury, acute pneumonia etc.

o  Immediately after surgery, during menstruation and at the time of pregnancy.

o  Heart disease, mental imbalance, skin disease etc.

o  In a state of intoxication, after taking pain relievers and blood thinners

o  Kidney and liver failure.